सर्व पितृ दोष निवारण अमावस्या

0

हर महीने आने वाली अमावस्या का दिन पितरो को समर्प्रित दिन माना जाता है | पुरे साल आने वाली अमवास्यो में सबसे मुख्य अमावस्या है आश्विन मास की अमावस्या जो अति फलदाई बताई गयी है | इसे सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहते है |

ज्ञात और अज्ञात पितरो को पूजने का यह सबसे बड़ा दिन होता है | आश्विन कृष्ण पक्ष के दिनों में यह पितर अपने लोक से हम्हरे लोक में हम्हारे परिवार के आस पास पास मंडराते रहते है और यदि इन्हे हम सम्मान दे तो यह खुश और इनकी अनदेखी करने से यह नाराज हो जाते है |

इस दिन अपने पितरो की शांति के लिए गीता के सातवे अध्याय का पाठ पढ़े और उसका फल अपने पितरो को प्रदान करे|

कहते है जो व्यक्ति पितृपक्ष के पन्द्रह दिनों तक तर्पण ,श्राद्ध आदि नहीं कर पाते अथवा जिन लोगो को अपने पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो, उन सभी लोगो के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, दान आदि इसी अमावस्या को किया जाता है।

पीपल के पेड़ से पितरो को शांति

पितृ पक्ष के अंतिम दिन जो सर्व पितृ दोष अमावस्या का दिन होता है |

एक स्टील का लोटा ले उसमे कच्चा दूध कुछ काले तिल, डाब, दो बतासे, दो लौंग डालकर पीपल के पेड़ के निचे अर्पित करे | फिर कुछ मिठाई, पुष्प, एक नारियल, कुछ सिक्के और एक जनेऊ पीपल के माध्यम से अपने पितरो को समर्पित करे | फिर पीपल के पेड़ के सात परिक्रमा करे और इस मंत्र का जाप करे मन ही मन

 ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नमः

ॐ नमो भगवत वासुदेवाय:

Share.

About Author

Comments are closed.