कार्तिक माह महत्व

0

कार्तिक मास अत्यधिक पवित्र माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का आठवां महीना कार्तिक होता है। पुराणों में कार्तिक मास को स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। पूरे माह स्नान, दान, दीपदान, तुलसी विवाह, कार्तिक कथा का माहात्म्य आदि सुनते हैं। ऎसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है व पापों का शमन होता है। आध्यात्मिक ऊर्जा एवं शारीरिक शक्ति संग्रह करने में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। इसमें सूर्य की किरणों एवं चन्द्र किरणों का पृथ्वी पर पड़ने वाला प्रभाव मनुष्य के मन मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है।

कार्तिक मास के दौरान विशेष तौर पर राधा-दामोदर पूजन, विष्णु पूजा एवं तुलसी पूजा से साधक का कल्याण होता है।

कार्तिक माह महत्व

कार्तिक हिंदी पंचाग का आँठवा महिना है। कार्तिक के महीने में दामोदर भगवान की पूजा की जाती हैं । यह महिना शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है, जिसके बीच में कई विशेष त्यौहार मनाये जाते हैं ।

  • इस माह में पवित्र नदियों में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का बहुत अधिक महत्व होता हैं , घर की महिलायें सुबह जल्दी उठ स्नान करती हैं, यह स्नान कुँवारी एवम वैवाहिक दोनों के लिए श्रेष्ठ हैं ।
  • इस माह की एकादशी जिसे प्रबोधिनी एकादशी अथवा देव उठनी एकादशी कहा जाता हैं इसका सर्वाधिक महत्व होता हैं इस दिन भगवान विष्णु चार माह की निंद्रा के बाद उठते हैं जिसके बाद से मांगलिक कार्य शुरू किये जाते हैं ।
  • इस महीने तप एवम पूजा पाठ उपवास का महत्व होता हैं जिसके फलस्वरूप जीवन में वैभव की प्राप्ति होती हैं । इस माह में तप के फलस्वरूप मोक्ष की प्राप्ति होती हैं । इस माह के श्रद्धा से पालन करने पर दीन दुखियों का उद्धार होता हैं जिसका माह्त्य स्वयम विष्णु ने ब्रह्मा जी से कहा था । इस माह के प्रताप से रोगियों के रोग दूर होते हैं जीवन विलासिता से मुक्ति मिलती हैं ।

धर्म शास्त्रों में कार्तिक महीने को सबसे पुण्य का महीना माना गया है। स्कंद पुराण में इसे सबसे अच्छा महीना माना गया है, वहीं पद्म पुराण में कार्तिक को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष देने वाला माह माना गया है।  पौराणिक शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में दीपदान करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट होते हैं। कहा जाता है कि इस महीने में जो मनुष्‍य देवालय, नदी किनारे, तुलसी के समक्ष एवं अपने शयन कक्ष में दीप जलाते है, उसे सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।  यह वह समय होता है, जब ठंड धीरे-धीरे बढ़ रही होती है और शीत ऋतु में प्रवेश कर रही होती है। सुबह खेतों में घास व फसलों पर ओस की बूंदों के रूप में प्रकृति के अनुपम मोती अपनी छटा बिखेरते हैं। सुबह-सुबह इन मोतियों को निहारने व इन पर नंगे पांव चलने से ने केवल नेत्र-ज्योति तेज होती है, बल्कि शारीरिक और मानसिक शक्ति भी बढ़ती है।

इस माह में भगवान विष्णु का पुष्पों से अभिनन्दन करना चाहिए। ऎसा करनेसे अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। कर्तिक माह की षष्ठी को कार्तिकेय व्रतका अनुष्ठान किया जाता है स्वामी कार्तिकेय इसके देवता हैं। इस दिन अपनी क्षमतानुसार दान भी करना चाहिए। ऐसा भी कहा जाता है की भगवान शिव-पार्वती के पुत्र कुमार कार्तिकेय के नाम पर इस माह का नाम पड़ा कार्तिक माह। कथा है कि एक बार कार्तिक मास की महिमा जानने के लिए कुमार कार्तिकेय ने भगवान शिव से पूछा कि कार्तिक मास को सबसे पुण्यदायी मास क्यों कहा जाता है। इस पर भगवान शिव ने कहा कि नदियों में जैसे गंगा श्रेष्ठ है, भगवानों में विष्णु उसी प्रकार मासों में कार्तिक श्रेष्ठ मास है। इस मास में भगवान विष्णु जल के अंदर निवास करते हैं। इसलिए इस महीने में नदियों एवं तलाब में स्नान करने से विष्णु भगवान की पूजा और साक्षात्कार का पुण्य प्राप्त होता है।

कार्तिक मास में दीपदान

कार्तिक माह में दीप दान का महत्व होता हैं । इस दिन पवित्र नदियों में, मंदिरों में दीप दान किया जाता हैं । साथ ही आकाश में भी दीप छोड़े जाते हैं। यह कार्य शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता हैं । दीप दान के पीछे का सार यह हैं कि इससे घर में धन आता हैं । कार्तिक में लक्ष्मी जी के लिए दीप जलाया जाता हैं और संकेत दिया जाता हैं अब जीवन में अंधकार दूर होकर प्रकाश देने की कृपा करें । कार्तिक में घर के मंदिर, वृंदावन, नदी के तट एवम शयन कक्ष में दीपक लगाने का माह्त्य पुराणों में निकलता हैं ।

कार्तिक माह से तुलसी का महत्व

कार्तिक में तुलसी की पूजा की जाती हैं और तुलसी के पत्ते खाये जाते हैं । इससे शरीर निरोग बनता हैं। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके सूर्य देवता एवम तुलसी के पौधे को जल चढ़ाया जाता हैं । कार्तिक में तुलसी के पौधे का दान दिया जाता हैं ।

कार्तिक माह में भजन

कार्तिक माह में श्रद्धालु मंदिरों में भजन करते हैं । अपने घरों में भी भजन करवाते हैं । आजकल यह कार्य भजन मंडली द्वारा किये जाते हैं । इन दिनों रामायण पाठ, भगवत गीता पाठ आदि का भी बहुत महत्व होता हैं । इन दिनों खासतौर पर विष्णु एवम कृष्ण भक्ति की जाती हैं ।

कार्तिक माह में दान

कार्तिक माह में दान का भी विशेष महत्व होता हैं ।  इस पुरे माह में गरीबो एवम ब्रह्मणों को दान दिया जाता हैं । इन दिनों में तुलसी दान, अन्न दान, गाय दान एवम आँवले के पौधे के दान का महत्व सर्वाधिक बताया जाता हैं । कार्तिक में पशुओं को भी हरा चारा खिलाने का महत्व होता हैं ।

कार्तिक पूजा विधि नियम

कार्तिक माह में कई तरह के नियमो का पालन किया जाता है, जिससे मनुष्य के जीवन में त्याग एवम सैयम के भाव उत्पन्न होते हैं ।

  1. पुरे माह मॉस, मदिरा आदि व्यसन का त्याग किया जाता हैं । कई लोग प्याज, लहसुन, बैंगन आदि का सेवन भी निषेध मानते हैं ।
  2. इन दिनों फर्श पर सोना उपयुक्त माना जाता हैं कहते हैं इससे मनुष्य का स्वभाव कोमल होता हैं उसमे निहित अहम का भाव खत्म हो जाता हैं ।
  3. कार्तिक में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता हैं ।
  4. तुलसी एवम सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता हैं ।
  5. काम वासना का विचार इस माह में छोड़ दिया जाता हैं । ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता हैं ।

कार्तिक कथा

कार्तिक के समय भगवान शिव ने देवताओ को जालंधर राक्षस से मुक्ति दिलाई थी, साथ ही मत्स्य का रूप धरकर वेदों की रक्षा की थी ।
भगवान विष्णु और राधारानी को भी यह महीना सबसे अधिक पसंद है। राधारानी को यह महीना इसलिए पसंद है क्योंकि इसमें भगवान कृष्ण ने विलक्षण लीलाएं की हैं।
जिस प्रकार श्रावण मास शिव को समर्पित है तो फाल्गुन कामदेव को, उसी तरह पुरुषोत्तम मास विष्णु को तो कार्तिक मास कृष्ण को। इसीलिए, कार्तिक के संदर्भ में, ऐसी मान्यता है कि कृष्ण को वनस्पतियों में तुलसी, पुण्यक्षेत्रों में द्वारिका, तिथियों में एकादशी, प्रियजनों में राधा, महीनों में कार्तिक विशेष प्रिय हैं। कहा भी जाता है :

कृष्ण: प्रियो हि कार्तिक: कार्तिक: कृष्ण वल्लभ:

कार्तिक मॉस के त्यौहार

  1. पति की रक्षा के लिए  – करवाचौथ : कृष्ण पक्ष चतुर्थी
  2. अहौई अष्टमी एवम कालाष्टमी : कृष्ण पक्ष अष्टमी
  3. रामा एकादशी
  4. धन तेरस
  5. नरक चौदस
  6. दिवाली, कमला जयंती
  7. गोवर्धन पूजा – अन्नकूट महोत्सव
  8. भाई दूज / यम द्वितीया : शुक्ल पक्ष द्वितीय
  9. कार्तिक छठ पूजा
  10. गोपाष्टमी
  11. अक्षय नवमी/ आँवला नवमी, जगदद्त्तात्री पूजा
  12. देव उठनी एकदशी/ प्रबोधिनी
  13. तुलसी विवाह

भगवान कृष्ण को प्रिय है कार्तिक मॉस

भगवान कृष्ण को कार्तिक क्यों प्रिय है इसके लिए भविष्य पुराण में एक कथा है। कृष्ण की प्रतीक्षा में राधा कुंज में बैठी थी, कृष्ण की प्रतीक्षा में समय बीत रहा था और राधा की व्यग्रता भी। काफी प्रतीक्षा के पश्चात कृष्ण आए तब राधा खीझ उठी और उन्होंने अपना गुस्सा उतारने के लिए कृष्ण को लताओं की रस्सी से बांध दिया पर कृष्ण मंद-मंद मुस्कराते रहे।

यह देख राधा शीघ्र ही सामान्य संयत हो गई और कृष्ण से विलम्ब का कारण पूछा। कृष्ण ने बतलाया कि उस दिन कार्तिक में मनाया जाने वाला एक पर्व था और मैया यशोदा ने उन्हें रोक लिया और आयोजन के बाद ही उन्हें आने दिया। कारण जानकर राधा को क्षोभ हुआ और वह कृष्ण से क्षमा मांगने लगी। इस पर कृष्ण ने कहा कि राधा क्षमा मत मांगो मैं तो तुम्हारे साथ बंधा ही हूं और चूंकि आज तुमने प्रत्यक्ष रूप से मुझे बांधा।

इसलिए यह महीना मुझे विशेष रूप से प्रिय होगा। इस तरह कार्तिक महीने को एक और नाम मिलाराधा-दामोदर मास। इस संबंध में ऐसी मान्यता है कि इस महीने में राधा रानी का विधिपूर्वक पूजन-अर्चन करने से श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं और वे सभी कामनाओं की पूर्ति करते हैं क्योंकि राधा को प्रसन्न करने के समस्त उपक्रम कृष्ण को अतिप्रिय होते हैं।

ऐसा भी कहते हैं की आज के दिन ही माँ यशोदा ने एक रस्सी(दाम) लेकर बाल कृष्ण के पेट(उदर) को ऊखल से बाँध दिया था। जिस कारण दामोदर मास नाम पड़ा।

Share.

About Author

Comments are closed.